चुनावी मौसम ने आहें भरना सुरु कर दिया है । कुछ राज्यो में चुनाव होने हैं...धूल उड़नी है..हेलीकॉप्टर आने हैं...धर्मों को जानना है..दंगो का हिसाब होना है..रंगों को पहचानना है ...आंकड़ो का खेल होगा..एम्बुलेंस में पिंक मनी मिलेगी..गंगा नहाया जायेगा..गंगा साफ़ होगा...रोना धोना होगा..राम मंदिर शायद बन जायेगा...बांग्लादेशी बाहर होंगे...हीरो-हेरोइएनी भी आएगी...दारु - मिजाज की तो पूछो ही मत ।
कुछ खरच - बरच भी बटेंगे..और हाँ हमको तो बस इंतज़ार है फिर से इस बार की रिपोर्ट कार्ड की..अरे वही रिपोर्ट कार्ड जो एक पार्टी दूसरे को देती है कि कितना खाये और कितना पचाये..ठीक उसी तरह जैसे मास्टर जी हमारी मम्मी से कहते थे..कि 'बहिन आपने "नारपिचास" पैदा किया है,आपका ये "शहजादा" कुछ ना कर पायेगा..एक दम पप्पू है पप्पू । अभी तो एकदम थोक भाव से शिलान्यास और उद्धघाटन होंगे...श्रेय लेने की मारामारी अलग से..। इसबार नेता जी की एक रैली हमरो गांव में हो जाये बस..चकाचक रोड बन जायेगा 10 दिन में..कम से कम 2 महीना गांव के बच्चा सब साइकिल तो चला लेगा..फिर तो बरसात में खेती हो ही जायेगा उस पर ।
रामविस्वास लोहार कह रहा था कि उसके पास नेता सब के अभी से आर्डर आने सुरु हो गए हैं..जीभ के धार तेज़ करने के लिए...। हमनें तो यहाँ तक सुना है की ये नेता दोनों तरफ की धार तेज़ कराये रखते हैं..पता ना कब कहाँ का दाना पानी बंद हो जाये और कहाँ पालथी मारना पड़े ।
त्रिलोकी दादा का बेटा अमेरिका से आया है,बता रहा था कि वहाँ भी अभी -अभी चुनाव ख़त्म हुआ है और हिलेरी बहिन हार गयीं । उसने बताया कि ट्रम्प चाचा जीते हैं..बहुत अमीर हैं..बहुत बड़ा घर है..व्यापर है..सोने का संडास है । ये सुन कर हमको यक़ीन हो गया कि भारत -अमेरिका भाई है..सहोदर ,तभी तो एकदम एक जैसा लोग चुनता है। हमने भी पूछ लिया की तब, तुम बतायो वहाँ का चुनावी गालियां ...दो-चार तो सीखा ही होगा ?
उसने बोला की अमेरिका में चुनाव में गाली नहीं देते हैं बल्कि तथ्यों पर बोलते हैं ..?
बगल में बैठी तुलसी चाची बोली -का...? कौनो नेता गाली नहीं देत है?
हमने भी पूछ लिया मतलब वहाँ कोई मौत का सौदागर...खुनी पंजा..असली बाप का..मुह पर थूकना ..ज़हर की खेती..ये सब नहीं कहते एक दूसरे को ?
उसने कहा कि नहीं..वो लोग आगे क्या काम करेंगे इसकी पूरी प्लानिंग और आमने सामने बैठकर बात करते हैं..।विलायती बाबू बोले :- तो क्या यहाँ ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं .? अब हम उनको कैसे बताये की हमारे यहाँ के चुनावी जुमलो के आगे तो सलीम - जावेद भी पानी भरते हैं।
हमने मन ही मन कहा धत तेरी की..ये कैसा चुनाव ,एतना शांति से..बिना मज़ा के..बिना गली गलौज के....भारत में संभव है क्या ??
भारत में संभव है क्या की सभी घोषणाए बिना चुनावी रंगत योढे हो? झूठे वादे ना हो ?
सोच ही रहा था कि एक टेम्पो गाना बजाते आगे बढ़ा...गाना पार्टी विशेष की वंदना थी । रघुपति दादा बोल पड़े-अच्छा गाना है हो..इस बार इसी को वोट दिया जाये ।
विलायती बाबू आश्चर्य से इनकी तरफ देखकर पूछे तो क्या आपलोग गाना पर वोट देते हैं ...??
मैं बोल पड़ा-कुछो पर दे क्या फर्क पड़ता है वैसे इसबार उसको देंगे जो बिजली देगा .।
इसबार दुगनी आश्चर्य से पूछा क्या गांव में बिजली नहीं है ?..पोल तो खड़ा है..तार भी है ...बाहर बोर्ड भी लगा है कि इस गाँव का विधुतीकरण कर दिया गया है और उस पर तो पांच साल पहले की तारीख भी है....! सब ने इसबार एक स्वर में कहा- welcome to "Bharat". और तभी एक टेम्पो एक व्यक्ति विशेष की मधुर स्तुति करते हुए गुजर गया ।
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