इस बार की सर्दी में गर्मी कुछ ज्यादा ही है ।मुझसे तो स्वेटर पहनकर बिलकुल लाइन में लगा नहीं जाता..एक दो घंटे तो संभाल भी लूँ पर 4-5 घंटे में पसीने छूट जाते हैं । कोई बात नहीं देश से कालाधन मिट रहा है... शायद !
लाइन में लगे लगे अब तो जान पहचान भी हो गयी है...मूंगफली की पार्टी भी चलती है पर इन बीच पैसे देकर खड़े किये गए लोग नजर नहीं आते जिसके बारे में कल एक महाशय टीवी पर बोल रहे थे ।
मोदी साहब ने मुझे में दो अच्छे बदलाव ला दिए हैं जो मम्मी नही ला पायी थी । पहली सुबह जल्दी उठने की और दूसरी रोज पेपर पढ़ने की । सुबह उठ जाता हूँ क्योंकि लाइन में 8 बजे तक 75वा नंबर तक मिल जाता है और पेपर इसलिए पढता हूँ क्योंकि रोज मोदी जी अपनी टीम के साथ नए रूल बना देते हैं...उत्सुकता खत्म नहीं होने देते, रोज पढता हूँ की आज नोट कितने मिलेंगे, अब कहाँ चलेंगे, कहाँ नहीं चलेंगे ,और नया क्या होगा ।
ये नोटो का खेल बड़ा पुराना है । कभी वापस आते हैं कभी बंद होते हैं ।
1946 के पहले 1000 के नोट चलते थे,फिर 1946 में बंद हो गये । फिर 1954 में 1000, 5000, 10000 के नोट आ गये और 1978 सब बंद हो गए । फिर 1987 में 500 आया और 2000 में 1000 । फिर 2016 में दोनों ने अपनी रंगत बदलकर मुश्किल में डाल दिया । तो जब भी सरकारों को बोरिंग सा फील होता वो देहाती कहावत "इस कोठी का धान उस कोठी" को सार्थक करने में जुट जाते हैं ।
किसी ने कहा है कि अपने लोगो को भी नहीं पता था , किसी ने कहा है कि अपने लोगो ने सब ठिकानें लगा दिये..जमीनें खरीद ली..किसी ने कहा अम्बानी को सब पता था क्योंकि उर्जित पटेल पहले अम्बानी के सलाहकार थे । अब इन सब को कौन शोध कर के प्रमाणित करें ,मुझे तो टमाटर 15 रूपये किलो मिलने शुरू हो गये हैं । सब बोल रहे थे की डिजिटल हो जाओ...खर्च करो नहीं तो आर्थिक मंदी आ जायेगी ,तो भाई खर्च करे तो क्या करें..
पैसा तो हो ।
कहाँ कहाँ डिजिटल हो जाये ..समझ नहीं आ रहा है । गोलगप्पे पर हो जाये या मूंगफली पर ...या फिर दहेज़ भी डिजिटल ही कर ही दे दें क्या पर वो तो मान ही नहीं रहे हैं , उनको तो नगद चाहिए ।
दूर खड़े होकर रास्ता मत बताईये...फिक्र है तो एक काम कीजिये..कल हमको सोने दीजिये और लाइन में लग जाईये मेरे बदले ।
मेरे आत्मविचार हैं...जरुरी नहीं है आपकी सहमति हो, पर एक कोशिश है | मुझे पढ़िए...समझिये...सुधारिये और सिखाइये |
Sunday, December 18, 2016
नोटबंदी : इस कोठी का धान उस कोठी
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