Tuesday, December 6, 2016

अम्मा..जिसको कोई समझ ना सका ।

अम्मा को खोने का दुःख है । व्यक्तिगत रूप से ना उनके जीवन को ज्यादा पढ़ा है न समझा है...राजनीतिज्ञ थीं..लोगो से उनका अविभाजित लगाव था । मैं उनके करीबी लोगों में से नहीं हूँ पर समर्थको के आंसू झूठे नहीं लग रहे हैं और इसी आधार पर लिख रहा हूँ ।
मेरी व्यक्तिगत रूचि तब जागी थी अम्मा को जानने में जब 1997 में विजिलेंस ने उनके यहाँ से 10500 साड़िया और 750 जोड़ी जुते बरामद किये थे । बड़ा आश्चर्य हुआ था..तब जाकर पता चला की ये राजनीतिज्ञ एक विख्यात अभिनेत्री और नर्तकी थी। बाद में इनके राजनीतिक सफर को भी पढ़ा  पर वो कभी नहीं मिला जो मैं जानना चाहता था।

1982-84 से सक्रिय रहकर 1991 में मुख्यमंत्री बन जाना अपने आप में रोचक था...सफर की दास्ताँ भी सफल लोगो से मेल खाती थी..मसलन इन्होंने भी विरोध झेले..परेशानियां उठाई...साड़ी फाड़ दी गयी..पीटा गया..घसीटा गया...वो रो रही थी...उन्ही के पार्टी के विधायक सब देख रहे थे...वो भी विधान सभा में..और भी बहुत कुछ हुआ शुरुआती राजनितिक जीवन में...फिर अम्मा ने सर उठाया और बाकियों को नतमस्तक कराया...और भी बहुत सारी घटनाएँ और कहानियां पढ़ा और जाना जो जयललिता को अम्मा बनाती थीं ।

मैं "जयललिता" के जीवन को जानने का उत्सुक था...पर पता चला की उनकी शख्शियत ऐसी थी की उनके अपने मंत्री तक उनसे बात करने में डरते थे..फिर किसकी मजाल थी जो अम्मा की जीवनी बताये..हाँ अम्मा ने खुद कई बार कहा कि उनका जीवन एक खुली किताब है । पर मैं समझता हूँ की उस खुली किताब में ऐसी भाषा लिखी होगी जिसको आज तक सिर्फ पनीरसेल्वम और शशिकला ने ही समझा । सोनिया गांधी संग चाय और वाजपेयी सरकार को समर्थन ...ऐसे व्यक्तित्व को समझना कहा आसान था ? वह हर चीज में  अव्वल थीं..10वीं में टॉपर..अभिनेत्री बनकर नाम और इनाम सब कमाये....राजनीति का रुख किया तो लोगों की अम्मा बन बैठी..अपने अंतिम सफर में भी राष्ट्रीय सम्मान के साथ विदा लिया ।

विरोधियो को नजरअंदाज कर के सहेली के बेटे की शाही शादी करवाना सब की वश की बात कहा थीं। चेन्नई जब बाढ़ से डूब रहा था और 2 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने थे...विरोधियो ने अपनी जीत पक्का समझ लिया था..उस वक़्त भी अम्मा ने उन्हें अपनी और उनकी औकात बता दिया और फिर सत्ता पर काबिज हुईं । 1991 से 2016 तक 25 सालों में 6 बार प्रदेश की मुख्यमंत्री ..यही अम्मा की पहचान थी ।

तामिलनाडु में BPL परिवारों को 20 किलो अनाज..14 रूपये किलो नमक, 5 रूपये में खाना,10 रूपये में पानी, मोबाइल, अम्मा सिनेमा घर, बेबी किट और न जाने क्या क्या...ये सब अम्मा ही कर सकती थीं ।
।।।।।।।........आपको सलाम........।।।।।।

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